कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की बोनी हेतु कृषकों को दी वैज्ञानिक सलाह


ग्वालियर | वर्षा के आगमन पश्चात सोयाबीन की बोवनी हेतु मध्य जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह का उपयुक्त समय है। उत्पादन में स्थिरता की दृष्टि से 2 से 3 वर्ष में एक बार खेत की गहरी जुताई करना लाभप्रद है। अत: जिन किसान भाईयों ने खेती की गहरी जुताई नहीं की हो, तो अवश्य करें। उसके बाद बख्खर / कल्टीवेटर एवं पाटा चलाकर खेत को तैयार करें। उपलब्धता अनुसार अपने खेत में 10 मीटर के अंतराल पर सब-सॉयलर चलाएं, जिससे मिट्टी की कठोर परत को तोड़ने से जल अवशोषण/नमी का संचार अधिक समय तक बना रहें । खेत की अंतिम बखरनी से पूर्व अनुशंसित गोबर की खाद (10 टन प्रति हैक्टेयर) या मुर्गी की खाद (2.5 टन प्रति हैक्टेयर) की दर से डालकर खेत में फैला दें। अपने क्षेत्र के लिये अनुशंसित सोयाबीन किस्मों में से उपयुक्त किस्म का चयन कर बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उपलब्ध सोयाबीन बीज का अंकुरण परीक्षण (न्यनतम 70 प्रतिशत) सुनिश्चित करें।
    किसान कल्याण तथा कृषि विकास के उपसंचालक  ने किसानों से आग्रह किया है कि बोवनी के समय आवश्यक आदान जैसे उर्वरक, खरपतवारनाशक, फफूंदनाशक, जैविक कल्चर आदि का क्रय कर उपलब्धता सुनिश्चित करें। बोवनी के समय बीज उपचार के लिये अनुशंसित फफूंदनाशक जैसे पेनफ्लूफेन + ट्रायफ्लोक्सी स्ट्रोबीन (एक मि.ली. प्रति कि.ग्रा. बीज) अथवा थायरम + कार्बेन्डाजिम (2:1) 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज अथवा जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज तत्पश्चात जैविक कल्चर ब्रेडीराइझोबियम जपोनिकम एवं स्फुर घोलक जीवाणु (पीएसएम) की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें। पीला मोजाईक बीमारी की रोकथाम हेतु अनुशंसित कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30 एफ एस (10 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज) या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफ एस (1.2 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज) से उपचार करने हेतु क्रय/उपलब्धता सुनिश्चित करें।